आँखों से पानी क्यों आता है- जानिए लक्षण कारण और आयुर्वेदिक इलाज

Watering Eyes

आँखों से पानी आना (Watery Eyes) एक कॉमन और बहुचर्चित समस्या है | यह लोगो को समय समय पर परेशान करती है  और इसे  मेडिकल भाषा  में  एपिफोरा (Epiphora) कहा जाता है। ऐसे कंडीशन में आंखों से जरूरत से ज्यादा आंसू निकलने लगते हैं। इसके साथ-साथ आंखों में जलन, खुजली या लालपन भी महसूस हो सकता है। अधिकतर मामलों में यह कोई गंभीर समस्या नहीं होती, लेकिन कई बार यह किसी अन्य आंखों की बीमारी या स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है। इसलिए यदि यह समस्या बार-बार  आपको परेशान कर रही है या लंबे समय तक बनी  हुई है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस लेख में हम आँखों से पानी आने के कारण, लक्षण और इसके संभावित उपचार के बारे में विस्तार से जानेंगे।

आँखों से पानी आने के लक्षण (Watery Eyes Symptoms)

जब आँखों से बार-बार या जरूरत से ज्यादा पानी आने लगता है, तो इसके साथ कुछ और परेशानियाँ भी महसूस हो सकती हैं। आमतौर पर लोगों को ये लक्षण दिखाई देते हैं:

  • आँखों से लगातार या जरूरत से ज्यादा आँसू आना
  • आँखों में जलन, चुभन या असहज महसूस होना
  • तेज रोशनी या धूप में देखने में परेशानी होना
  • आँखों की पलकों में सूजन आ जाना
  • आँखों के आसपास सूखी पपड़ी या गंदगी जम जाना
  • आँखों का लाल हो जाना
  • ज्यादा पानी आने की वजह से चीजें धुंधली दिखाई देना
  • आँखों से चिपचिपा पानी या बलगम निकलना
  • देखने में बदलाव महसूस होना, जैसे धुंधला दिखना या किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना

अगर ये लक्षण बार-बार दिखाई दें या लंबे समय तक बने रहें, तो आँखों के डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।।

आँखों से पानी आने की समस्या क्यों होती है? (What causes watery eyes)

आँखों से पानी आना कई कारणों से हो सकता है। ऐसे में सबसे पहले यह समझना जरूरी होता है कि आँखों से पानी आने का असली कारण क्या है, क्योंकि इलाज उसी के आधार पर तय किया जाता है। हमारी आँखों में आँसू बनने और बाहर निकलने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है। आँसू आँखों को साफ रखते हैं, नमी बनाए रखते हैं और धूल-मिट्टी से सुरक्षा भी देते हैं। लेकिन जब आँसू बहुत ज्यादा बनने लगते हैं या सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाते, तो आँखों से पानी बहने लगता है।

1. एलर्जी (Allergy) (pollen), धूल, धुआं, पालतू जानवरों के बाल या कुछ खाद्य पदार्थों से एलर्जी होने पर आंखों में पानी आ सकता है। जब ये एलर्जी पैदा करने वाले तत्व आंखों के संपर्क में आते हैं, तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया सक्रिय हो जाती है, जिससे आंखों में खुजली, लालिमा और अधिक आंसू निकलने लगते हैं।

2. ड्राय आई सिंड्रोम (Dry Eye Syndrome)

सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन सूखी आंखों के कारण भी आंखों से ज्यादा पानी आ सकता है। जब आंखें बहुत ज्यादा सूखी हो जाती हैं, तो शरीर इसकी भरपाई के लिए ज्यादा आंसू बनाने लगता है। यह समस्या लंबे समय तक स्क्रीन देखने, धूल-धुएं वाले वातावरण, उम्र बढ़ने या हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकती है

3. आंखों में जलन या इरिटेशन

धूल, धुआं, प्रदूषण या किसी केमिकल के संपर्क में आने से आंखों में जलन हो सकती है। ऐसे में आंखें खुद को सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा आंसू बनाने लगती

4. आंसू की नलिका में रुकावट

कई लोगों में आँसू बाहर निकालने वाली नलिका ब्लॉक हो जाती है। ऐसी स्थिति में आँसू सही से बाहर नहीं निकलते और आँखों से बहने लगते हैं।

5. ज्यादा स्क्रीन का इस्तेमाल

आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का ज्यादा इस्तेमाल आँखों पर दबाव डालता है। इससे आँखों में थकान और पानी आने की समस्या हो सकती है।

6. धूप और ठंडी हवा

तेज धूप या ठंडी हवा के संपर्क में आने से भी कई लोगों की आँखों से पानी आने लगता है।

घर पर आयुर्वेदिक उपचार (Watery Eyes Treatment at Home)

आयुर्वेद में कई सरल और प्रभावी घरेलू उपाय बताए गए हैं जो watery eyes की समस्या में राहत दे सकते हैं:

गुलाब जल (Rose Water)

शुद्ध गुलाब जल की 2-2 बूँदें आँखों में डालने से जलन और अत्यधिक आँसू में राहत मिलती है। यह आँखों को शीतलता प्रदान करता है और पित्त दोष को शांत करता है।

 त्रिफला नेत्र  (Triphala Eye Wash)

रात को एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को पानी में भिगोएँ। सुबह इस पानी को छानकर ठंडा होने पर आँखों को धोएँ। त्रिफला तीनों दोषों को संतुलित करता है, नेत्र नलिकाओं की सफाई करता है और संक्रमण से बचाता है। यह best treatment for watery eyes में से एक माना जाता है।

 कच्चे आलू का रस (Raw Potato Juice)

कच्चे आलू को घिसकर उसका रस निकालें और रुई से आँखों के बाहर लगाएँ। यह सूजन और पानी आने की समस्या को कम करता है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियाँ (Ayurvedic Treatment for Watery Eyes)

घरेलू उपायों के अलावा, आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा में कुछ विशेष थेरेपियाँ हैं जो watery eyes की जड़ तक उपचार करती हैं:

नेत्र तर्पण (Netra Tarpana) — 

इस थेरेपी में आटे से आँखों के चारों ओर एक घेरा बनाकर उसमें शुद्ध घृत (घी) भरा जाता है। यह नेत्र-पोषण की सर्वश्रेष्ठ विधि है। Netra Tarpana आँसू नलिकाओं को मज़बूत करती है, नेत्र-पेशियों को पोषण देती है, और watery eyes के मूल कारण को दूर करती है। Mirasa Ayurveda Centre में यह उपचार विशेषज्ञ आयुर्वेदाचार्यों की देखरेख में किया जाता है।

 शिरोधारा (Shirodhara)

जब watery eyes का कारण तनाव, नींद की कमी या मानसिक थकान हो, तब शिरोधारा अत्यंत प्रभावी होती है। गर्म औषधीय तेल को मस्तक पर धीरे-धीरे डाला जाता है जिससे तंत्रिका तंत्र शांत होता है और नेत्र-सम्बंधी समस्याएँ कम होती हैं।

 नस्य कर्म (Nasya)

नाक के माध्यम से औषधीय तेल डालने की यह विधि नेत्र और नासा मार्ग को साफ करती है। यह आँसू नलिकाओं के अवरोध को खोलने में विशेष रूप से सहायक है।

अश्चोतन (Aschotana — Ayurvedic Eye Drops)

जड़ी-बूटियों से बनी आयुर्वेदिक नेत्र-बूँदें आँखों में डाली जाती हैं। ये प्राकृतिक आई ड्रॉप्स संक्रमण को दूर करती हैं, जलन कम करती हैं और आँसू उत्पादन को नियंत्रित करती हैं।

Conclusion 

आँखों से पानी आना एक आम समस्या हो सकती है, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बना रहे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके पीछे एलर्जी, संक्रमण, धूल-मिट्टी, ज्यादा स्क्रीन देखने जैसे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए सबसे जरूरी है कि इसके कारण को समझा जाए और उसी के अनुसार सही इलाज किया जाए। अगर समस्या लगातार बनी रहती है या इसके साथ दर्द, जलन या धुंधली दृष्टि जैसी परेशानी भी हो, तो समय रहते आँखों के विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।आँखें हमारे शरीर का बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए उनकी सही देखभाल करना बहुत जरूरी है।

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